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चींटी - सुमित्रानंदन पंत

चींटी को देखा? वह सरल, विरल, काली रेखा तम के तागे सी जो हिल-डुल, चलती लघु पद पल-पल मिल-जुल, यह है पिपीलिका पाँति! देखो ना, किस भाँति काम करती वह सतत, कन-कन कनके चुनती अविरत। गाय चराती, धूप खिलाती, बच्चों की निगरानी करती लड़ती, अरि से तनिक न डरती, दल के दल सेना संवारती, घर-आँगन, जनपथ बुहारती। चींटी है प्राणी सामाजिक, वह श्रमजीवी, वह सुनागरिक। देखा चींटी को? उसके जी को? भूरे बालों की सी कतरन, छुपा नहीं उसका छोटापन, वह समस्त पृथ्वी पर निर्भर विचरण करती, श्रम में तन्मय वह जीवन की तिनगी अक्षय। वह भी क्या देही है, तिल-सी? प्राणों की रिलमिल झिलमिल-सी। दिनभर में वह मीलों चलती, अथक कार्य से कभी न टलती।

चिपको आंदोलन (Chipko Movement)

चिपको आन्दोलन पर्यावरण के संरक्षण के लिए चलाया गया एक आन्दोलन है। इसके अंतर्गत पेड़ों के संरक्षण हेतु प्रयास किये गये थे। इसे चिपको आन्दोलन इसलिए कहते हैं कि पेड़ों को कटने से बचाने के लिए महिलाएँ तथा अन्य लोग आन्दोलन के दौरान पेड़ों से चिपक जाते थे। इस आन्दोलन की शुरुआत 1973 में वर्तमान उत्तराखण्ड के गढ़वाल जिले के गाँव रेनी से हुई थी। इसकी पृष्ठभूमि यह है कि गाँव वाले अपने कृषि उपयोग के लिए अंगू वृक्ष (Ash Tree) को काटना चाहते थे, लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें इसकी अनुमति प्रदान नहीं की। लेकिन कुछ ही समय बाद सरकार ने खेल का सामान बनाने वाली एक निजी कम्पनी को इन पेड़ों को काटने की अनुमति प्रदान कर दी। जिसका गाँव वालों ने बहुत विरोध किया। जब कम्पनी के ठेकेदार पेड़ काटने के लिए गाँव में आये तो महिलायें पेड़ों से चिपक गयीं तथा कम्पनी के ठेकेदार पेड़ों को नहीं काट सके। इस प्रकार चिपको आन्दोलन की शुरुआत हुई। बाद में यह आन्दोलन उत्तराखंड के समूचे टेहरी गढ़वाल और कुमायूं क्षेत्र में फैल गया। इस आन्दोलन में सम्पूर्ण उत्तराखंड में पेड़ों को बचाने के लिए महिलाओं और अन्य लोगों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। इस आन्द...

नर हो न निराश करो मन को - सम्पूर्ण कविता

नर हो, न निराश करो मन को। कुछ काम करो, कुछ काम करो जग में रह कर कुछ नाम करो यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो कुछ तो उपयुक्त करो तन को नर हो, न निराश करो मन को। संभलो कि सुयोग न जाय चला कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला समझो जग को न निरा सपना पथ आप प्रशस्त करो अपना अखिलेश्वर है अवलंबन को नर हो, न निराश करो मन को। जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो उठके अमरत्व विधान करो दवरूप रहो भव कानन को नर हो न निराश करो मन को। निज गौरव का नित ज्ञान रहे हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे मरणोंत्‍तर गुंजित गान रहे सब जाय अभी पर मान रहे कुछ हो न तजो निज साधन को नर हो, न निराश करो मन को। प्रभु ने तुमको कर दान किए सब वांछित वस्तु विधान किए तुम प्राप्‍त करो उनको न अहो फिर है यह किसका दोष कहो समझो न अलभ्य किसी धन को नर हो, न निराश करो मन को। किस गौरव के तुम योग्य नहीं कब कौन तुम्हें सुख भोग्य नहीं जन हो तुम भी जगदीश्वर के सब है जिसके अपने घर के फिर दुर्लभ क्या उसके जन को नर हो, न निराश करो मन को। करके विधि वाद न खेद करो निज लक्ष्य निरन्तर भेद करो बनत...

नमक का दारोगा - सम्पूर्ण पाठ

जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वरप्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे. अनेक प्रकार के छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ, कोई घूस से काम निकालता था, कोई चालाकी से. अधिकारियों के पौ-बारह थे. पटवारीगिरी का सर्वसम्मानित पद छोड़-छोड़कर लोग इस विभाग की बरकंदाज़ी करते थे. इसके दारोगा पद के लिए तो वक़ीलों का भी जी ललचाता था. यह वह समय था जब अंगरेज़ी शिक्षा और ईसाई मत को लोग एक ही वस्तु समझते थे. फ़ारसी का प्राबल्य था. प्रेम की कथाएं और शृंगार रस के काव्य पढ़कर फ़ारसीदां लोग सर्वोच्च पदों पर नियुक्त हो जाया करते थे. मुंशी वंशीधर भी जुलेखा की विरह-कथा समाप्त करके सीरी और फ़रहाद के प्रेम-वृत्तांत को नल और नील की लड़ाई और अमेरिका के आविष्कार से अधिक महत्व की बातें समझते हुए रोज़गार की खोज में निकले. उनके पिता एक अनुभवी पुरुष थे. समझाने लगे,‘बेटा! घर की दुर्दशा देख रहे हो. ऋण के बोझ से दबे हुए हैं. लड़कियां हैं, वे घास-फूस की तरह बढ़ती चली जाती हैं. मैं कगारे पर का वृक्ष हो रहा हूं, न मालूम कब गिर पडूं! अब तुम्हीं घर के मालिक-मुख़्तार हो. ‘नौकरी में ओहदे की ...

विश्व के प्रमुख देशाें की संसद के नाम हिंदी में

विश्व के प्रमुख देशाें की संसद के नाम Name of Parliament of some important contries in Hindi मिस्र - पीपुल्स असेम्बली   पाकिस्तान - नेशनल असेम्बली   जर्मनी - बुंडस्टैग    यु एस ए - कांग्रेस    बांग्लादेश - जातीय संसद   इजरायल - नेसेट    जापान - ङायट    मालदीव - मजलिस   आस्ट्रेलिया - संघीय संसद    स्पेन - कोर्टेस  नेपाल - राष्ट्रीय पंचायत रूस - ड्यूमा   चीन - नेशनल पीपुल्स कांग्रेस  फ़्रांस - नेशनल असेम्बली  ईरान - मजलिस   मलेशिया - दीवान निगारा   अफगानिस्तान - शूरा तुर्की - ग्रैंड नेशनल असेम्बली   पोलेंड - सेज्म   मंगोलिया - खुराल    डेनमार्क -  फोल्केटिंग    स्विटजरलेंड - फेडरल असेम्बली    नीदरलैंड - स्टेट जनरल  ब्राजील - राष्ट्रीय कांग्रेस इटली - सीनेट  कुवैत - नेशनल असेंबली   सऊदी अरब - मजलिस अल शूरा  

कुछ महान कार्यों से सम्बंधित व्यक्ति

1. ब्रह्म समाज – राजाराममोहन राय 2. आर्य समाज – स्वामी दयानंद सरस्वती 3. प्रार्थना समाज – आत्माराम पांडुरंग 4. दीन-ए-इलाही, मनसबदारी प्रथा – अकबर 5. भक्ति आंदोलन – रामानुज 6. सिख धर्म – गुरु नानक 7. बौद्ध धर्म – गौतमबुद्ध 8. जैन धर्म – महावीर स्वामी 9. इस्लाम धर्म की स्थापना, हिजरी सम्वत – हजरत मोहम्मद साहब 10. पारसी धर्म के प्रवर्तक – जर्थुष्ट 11. शक सम्वत – कनिष्क 12. मौर्य वंश का संस्थापक – चन्द्रगुप्त मौर्य 13. न्याय दर्शन – गौतम 14. वैशेषिक दर्शन – महर्षि कणाद 15. सांख्य दर्शन – महर्षि कपिल 16. योग दर्शन – महर्षि पतंजली 17. मीमांसा दर्शन – महर्षि जैमिनी 18. रामकृष्ण मिशन – स्वामी विवेकानंद 19. गुप्त वंश का संस्थापक – श्रीगुप्त 20. खालसा पन्थ – गुरु गोविन्द सिंह 21. मुगल साम्राज्य की स्थापना – बाबर 22. विजयनगर साम्राज्य की स्थापना – हरिहर व बुक्का 23. दिल्ली सल्तनत की स्थापना – कुतुबुद्दीन ऐबक 24. सतीप्रथा का अंत – लॉर्ड विलियम बेंटिक 25. आंदोलन : असहयोग,सविनय अवज्ञा, खेडा, चम्पारन, नमक, भारत छोडो – महात्मा गाँधी 26. हरिजन संघ की स्थापना – महात्मा गाँधी 27. आजाद हिंद फ़ौज की स्थापन...